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श्रद्धा, भक्ति व ध्यान:- श्री श्री रवि शंकर

Post Date: July 4, 2020

श्रद्धा, भक्ति व ध्यान:- श्री श्री रवि शंकर

विश्वास दिमाग का विषय है।
भक्ति हृदय का विषय है।
और ध्यान, दिमाग व हृदय दोनों को जोड़ता है।
एक विकसित बुद्धि श्रद्धा पूर्ण होती है। एक विकसित हृदय ज्ञान से परिपूर्ण है। ध्यान आपकी बुद्धि व हृदय दोनों में ही परिपक्वता लाता है।
जॉन: प्राय: बुद्धिमान लोगों में श्रद्धा कुछ कम प्रतीत होती है।
श्री श्री: उनका विश्वास वस्तु-तत्व में अधिक होता है। दिमाग तत्व में ज्यादा विश्वास रखता है और हृदय अव्यक्त में, भावों में।
यह संभव है कि किसी भी बुद्धिजीवी व्यक्ति में श्रद्धा लेशमात्र भी न हो, भक्ति हो ही नहीं। प्रश्न केवल सन्तुलन और प्रौढ़ता का है।

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