शुक्र के शुभ के शुभ प्रभाव से जातक को संपूर्ण भोग व सुख की प्राप्ति होती है। शुक्र उत्तम भाषा शैली, मिलनसार स्वभाव एवं स्वच्छता का कारक ग्रह है।

Post Date: November 26, 2019

शुक्र के शुभ के शुभ प्रभाव से जातक को संपूर्ण भोग व सुख की प्राप्ति होती है। शुक्र उत्तम भाषा शैली, मिलनसार स्वभाव एवं स्वच्छता का कारक ग्रह है।

सोर परिवार का सर्वाधिक चमकीला ग्रह शुक्र दूरबीन से देखने पर सफेद प्रतीत होता है। यह अन्य ग्रहों में सर्वाधिक सुन्दर और चमदार है। इसकी चमक अत्यन्त कोमल, सुखदायी और दूध की भांति सफेद है।

पौराणिक कथाः शुक्र को दैत्यों का गुरू जाता है। महाभारत कथा के अनुसार शुक्र को शुक्राचार्य कहते हैं और ये दानवों के पुरोहित माने जाते हैं। इन्हें योग का आचार्य भी कहा जाता है। अपने शिष्य दानवों पर इनकी हमेशा कृपादृष्टि बनी  रहती है। भगवान शंकर की कठोर तपस्या कर शुक्राचार्य ने मृतसंजीवनी विध्या प्राप्त की, जिसके प्रभाव से वे मेरने वाले राक्षसों को पुनः जीवित कर लिया करते थे। मत्स्यपुराण के अनुसार शुक्राचार्य ने असुरों के उद्धार के लिये कठोर व्रत का अनुष्ठान किया इस व्रत से देवाद्देव भगवान शंकर प्रसन्न हुए और इन्हें वरदान दिया कि वे युद्ध में देवताओं को पराजित कर सकें। भगवान शंकर ने शुक्राचार्य को धन का अध्यक्ष भी बना दिया। इसी वरदान के आधार पर शुक्राचार्य पृथ्वीलोक और परलोक की समस्त सम्पत्तियों के स्वामी बन गए। महाभारत आदिपर्व के अनुसार केवल सम्पत्तियां ही नही, शुक्राचार्य औषधियाँ, मंत्रो तथा रसों के भी स्वामी हैं। इनकी सामार्थ्य अद्भुत हैं। इन्होंने अपनी समस्त सम्पत्ति अपने असुर शिष्यों को सौंप दी और स्वयं तपस्वी जीवन ग्रहण कर लिया। ब्रह्मा की कृपा से शुक्राचार्य ग्रह बन गए। कभी वृष्टि, कभी अवृष्टि, कभी भय, कभी अभय उत्पन्न कर ये प्राणियों के योगक्षेम का कार्य पूरा करते हैं। ग्रह के रूप में शुक्राचार्य ब्रह्मा की सभा में भी उपस्थित होते हैं। ये वर्षा रोकने वाले ग्रहों को शांत कर देते हैं। इनके अधिदेवता इन्द्राणी और प्रत्यधिदेवता इन्द्र  हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोणः सूर्य से गिनने पर यह सौर-मण्डल का दूसरा ग्रह है। शुक्र ग्रह के चारों ओर बहुत घना वायुमण्डल है। इस वायुमण्डल में इतने अधिक बादल हैं कि शुक्र ग्रह सफेद रूई में लिपटा सा प्रतीत होता है। टेलीस्कोप से देखने पर शुक्र ग्रह रूई का गोला लगता है। शुक्र का कोई उपग्रह नही है। शुक्र ग्रह की पृथ्वी से निकटतम दूरी तीन करोड़ तिर्यानवे लाख साठ हजार किलोमीटर (39360000) है। इसका औसत व्यास बारह हजार एक सौ चार किलोमीटर (12104) किमी. है। सूर्य से इसकी दूरी दस करोड़ छियोत्तर लाख छत्तीस हजार आठ सौ किलोमीटर (107636800) है। इसका घनत्व 5.19 ग्राम/सेमी3 और द्रव्यमान 4.87 X1024 किलोग्राम है। यह अपने अक्ष पर 243 दिनों में एक चक्कर लगाता है। यह अपनी धुरी पर 58.32 घन्टों में घूमता है। यह सूर्य की परिक्रमा लगभग 34.9 किलोमीटर प्रति सैकेण्ड की गति से 224 दिन तक 16 घन्टे और 48 मिनट में करता है। यह अन्य ग्रहों में सर्वाधिक सुन्दर और चमकदार है। इसकी चमक अत्यन्त कोमल, सुखदायी और दूध की भांति सफेद है।

कारकः शुक्र ग्रह वृषभ व तुला राशियों का अधिपत्य है। शुक्र सदैव शुभ ग्रह माना जाता है। पत्नी, अन्य, काम शास्त्र, सुकुमारता, सुदंरता, यौवन, ऐश्वर्य, आभूषण, काव्य, नृत्यगान, सिनेमा, टी.वी. इत्यादि का कारक ग्रह शुक्र है। शुक्र के शुभ के शुभ प्रभाव से जातक को संपूर्ण भोग व सुख की प्राप्ति होती है। शुक्र उत्तम भाषा शैली, मिलनसार स्वभाव एवं स्वच्छता का कारक ग्रह है। शुक्र जन्मकुण्डली में निर्बल हो तो हलकापन, निर्लज्ज, भयानक शब्द प्रियता आदि अवगुण करता है। भरणी, पूर्व फाल्गुणी व पूर्वाषाढ़ा नत्रक्षों का स्वामी शुक्र है।

शरीरः शरीर में वीर्य, पैर, वात तथा कफ का कारक शुक्र है। यह मूत्राशय का विकार, उपदंश आदि विकार, अपने दुर्व्यसन के कारण या अनीतिपथ पर चलने के कारण होने वाले रोग, वीर्यपात या उससे होने वाली दुर्बलता आदि विकार उत्पन्न करता है। शुक्र का रंग सफेद है। शुक्र की धातु सफेद सोना (प्लेटिनम) है।

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