व्याधि योग

Post Date: July 19, 2020

व्याधि योग

व्याधि योग
यदि लग्नेश एवं षष्ठेश मंगल के साथ हो तो युद्ध में विस्फोटक सामग्री से अंग भंग हो सकता है।
यदि लग्नेश एवं षष्ठेश बुध के साथ हो तो पित्त की अधिकता रहती है।

यदि लग्नेश एवं षष्ठेश के साथ शुक्र हो तो जीवन में सर्प पीड़ा का भय रहता है।

सप्तमेश शुक्र के साथ छठे भाव में हो तो उसकी स्त्री स्त्रीत्व से क्षीण हो सकती है।

दशम भाव में चंद्रमा, सप्तम भाव में मंगल एवं गुरू व शनि किसी भी भाव में साथ बैठे हो तो जातक निरंतर किसी न किसी व्याधि से ग्रस्त रहता है।

सूर्य तथा चंद्रमा सिंह राशि पर हों या सूर्य-चंद्र दोनों कर्क राशि स्थित हो तो जातक को सूखा रोग होता है।
जातक उपर्युक्त योगों से संबंधित रोगों से ग्रस्त रहता है।

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