विश्व के पाँच :- श्री श्री रवि शंकर

Post Date: July 22, 2020

विश्व के पाँच :- श्री श्री रवि शंकर

पहलू तुम्हारे व्यक्तित्व के पाँच पहलू हैं:

1 अस्ति (होना)
2 भाति (ज्ञान, अभिव्यक्ति)
3 प्रीति (प्रेम)
4 नाम
5 रूप

जड़- पदार्थ के दो पहलू हैं: नाम और रूप। चेतना के तीन पहलू हैं:

अस्ति (वह है’) भाति (उसे ज्ञान है और उसे व्यक्त करता है) प्रीति (वह प्रेममय है) समस्त ब्रह्मांड का यही रहस्य है। चेतना के इन तीन पहलुओं के प्रति अनभिज्ञ रहना, और जड़-पदार्थ के नाम-रूप में उलझ जाना ही माया (अज्ञान, भ्रम) है।

प्रश्न: हम अपूर्ण क्यों हैं?

श्री श्री: इसलिए कि हम पूर्णता की ओर बढ़े। अपूर्णता से परिपूर्णता की ओर बढ़ना ही जीवन है। एक बीज में पूर्ण वृक्ष समान होता है परन्तु वृक्ष बनने के लिए उसे अपने बीज के रुप को छोड़ना ही होगा। जीवन में या तो तुम प्रत्येक कदम पर अपूर्णता देख सकते हो या फिर एक पूर्णता से दूसरी पूर्णता की ओर गतिशीलता। जहाँ भी तुम अपना ध्यान केंद्रित करोगे, उसका विस्तार होगा।
यदि तुम्हारा ध्यान किसी अभाव पर है, तब उस अभाव की वृद्धि होगी।

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