*विराट :- श्री श्री रवि शंकर

Post Date: May 22, 2020

*विराट :- श्री श्री रवि शंकर

तुम जानते हो कि एक विराट मन होता है और एक छोटा मन। कभी विराट मन छोटे मन पर विजय पाता है और कभी इसका उल्टा भी होता है।
छोटे मन की विजय दुःखदायी है, विराट मन की विजय आनन्द है। छोटा मन आनन्द का आश्वासन देता है पर तुम्हारे हाथ कुछ नहीं लगता। विराट मन आरम्भ में कुछ बाधाएँ ला सकता है पर फिर हृदय को आनन्दित कर देता है।
गुरु शब्द का अर्थ है महान।
जय का अर्थ है जीत।
देव अर्थात् वह विद्या जो प्रसन्न चित्त, विनोदी और चंचल है। प्यार: विनोदी व्यक्ति गम्भीर नहीं होते और जो गम्भीर हैं वे सदा विनोद-प्रिय नहीं होते।
“जय गुरुदेव” अर्थात् तुममें जो महानता है, उसकी विजय : उस विराट मन की विजय जो विनोद-प्रिय भी है और गम्भीर भी। का अर्थ गुरु की जय नहीं है। तुम अपने विराट मन की विजय कहते हो, कुंठित छोटे मन पर अपनी आत्मा की जय, अपने विराट मन की विजय।

जय गुरुदेव

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