मोती एक फायदे अनेक । Sanjay Dara Singh AstroGem Scientist । असली नकली पहचान व् धारण करने के लाभ

Post Date: July 11, 2020

मोती एक फायदे अनेक । Sanjay Dara Singh AstroGem Scientist । असली नकली पहचान व् धारण करने के लाभ

मोती एक फायदे अनेक । Sanjay Dara Singh AstroGem Scientist । असली नकली पहचान व् धारण करने के लाभ

Gemstone Series

मोती एक फायदे अनेक
नवरत्नों में मोती की एक अलग ही पहचान है। मोती की संरचना में यह सबसे बडी खासियत है कि यह कोई धरती से निकलने वाला रत्न ना होकर समुंद्र के एक जलजीव के मुंह की लार से सीप के गर्भ में बनता है, तथा बहुत ही आकर्षक एवं संसार में सबसे पुराना रत्न होने के कारण नवरत्नों में एक विषेश स्थान रखता है। यह सफेद, क्रीम, गुलाबी, पीले, काले, सुनहरी इत्यादि रंगों में पाया जाता है।
मोती की संरचना
जब सीप का मुंह खुला होता है उस समय पानी में विचरित रेत इत्यादि का कण पानी के साथ-साथ सीप में चला जाता है तथा सीप में रहने वाला कीड़ा अपने मुंह की लार को उसके चारों तरफ फैलाना आरम्भ कर देता है तथा तब तक लार उगलता रहता है जब तक की मोती ना बन जाये तथा कीड़ा लार उगलते-उगलते ही मर जाता है, उस लार को नेकरेलेयर कहते हैं। कई बार एक ही सीप में एक से अधिक मोती भी पाये जाते हैं, उसका कारण यह है कि एकसाथ कई रेत के कण सीप में चले जाते हैं तथा सीप का कीड़ा समान रूप से उन सभी पर लार उगलता रहता है एवं एकसाथ कई मोतीयों की संरचना कर जाता है।
ज्योतिषय व नौकरी/व्यापार संदर्भ 
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कर्क राशि का स्वामी ग्रह चंद्रमा होता है और मोती को चंद्रमा का रत्न माना जाता है। जिनको भी चंद्रमा सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है उन्हें मोती धारण करने की सलाह दी जाती है। जो व्यक्ति कैमिकल, यात्रा, पानी, लीक्विड चीजों का व्यापार, डिसपोजेबल वस्तुओं, स्फेद वस्तुओं, घी, चीनी, दूध, दवाईयां, पैकिंग उत्पाद, क्षणिक आनंददायी अनुभूतियों से संबंधित कार्य इत्यादि के व्यापार/नौकरी इत्यादि से जुड़े हैं उन्हें मोती रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है।
स्वास्थय संबंधी
यह आत्मबल, मानसिक रोग, अत्याधिक क्रोध, एकाग्रता, उच्च कल्पना शक्ति, निर्णय क्षमता, सिरदर्द, एलर्जी, अत्याधिक विचारवान होना, वायु विकार, एसिड बनना, गैंस बनना, वाणी से कड़वे शब्दों का प्रयोग होना, बर्दाशत करने की क्षमता का कम हो जाना, पथरी, छाले होना इत्यादि विषयों के संदर्भ में भी मोती धारण करने की सलाह दी जाती है।
वर्तमान में मोती की प्राॅडक्शन
रतन विज्ञान के अनुसार मोती शुद्ध कैलिश्यम है। प्राचीन काल से ही मोती समुंद्र से निकाले जाते रहे हैं। श्रीलंका, परशियन खाड़ी, वेंजुएला, मैक्सिको, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, दक्षिण भारत के तूतीकोरण क्षेत्र, ईराक की बसरा खाड़ी इत्यादि क्षेत्रों से असली मोती निकाले जाते थे। अरब की खाड़ी में बसरा नामक स्थान से निकले मोती विश्व प्रसिद्ध थे और हैं परन्तु आज इस खाड़ी से कोई प्राॅडक्शन नहीं है। आज वर्तमान समय में अधिकतर मोती कृत्रिम रूप से झील, तालाब, नदी इत्यादि में मोती की खेती करके भी बनाये जाते हैं। आज कृत्रिम रूप से मोती चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, बंगाल की खाड़ी ऑस्ट्रेलियन दक्षिण समुंद्री क्षेत्र इत्यादि स्थानों पर अधिकतर कृत्रिम मोती की खेती की जाती है। ऑस्ट्रेलियन दक्षिण समुंद्री क्षेत्र में उत्पन्न मोती एक प्रभावशाली पीली आभा के साथ में होता है जिसे साउथ सी पर्ल के नाम से जाना जाता है। साॅल्टी वाॅटर पर्ल समुंद्र के खारे पानी में उत्पन्न होता है। फ्रैश वाॅटर पर्ल तालाब, नदी, झील इत्यादि में सीपों को पालकर उनकी खेती कर कृत्रिम रूप से बनाया जात है जिनमें कैलिश्यम सीड डाला जाता है और सीप का कीड़ा उसपर नेकरेलेयर चढ़ाकर मोती बना देता है।
वर्तमान समय में समुंद्र से उत्पन्न होने वाले मोती की उत्पादकता कम होने के कारण कृत्रिम मोतीयों ने इनकी जगह लेने का सक्षम प्रयास किया है। यह कृत्रिम मोती कम गुणवत्ता के होने के कारण भी इन्हें महंगी कीमतों में बेचा जात है। इसीलिए ग्राहकों को सतर्क रहते हुवे उन्हें किसी भी अच्छे ब्राण्ड का सील्ड व सर्टिफाईड उत्पाद ही खरीदना चाहिए क्योंकि बिना प्रमाणिकता के रत्नों में ग्राहक के साथ धोखा होने की संभावना अधिक होती है।
रत्नों की प्रमाणिकता को लेकर रत्न शास्त्र में कुछ टैस्ट होते हैं अगर कोई रत्न उन सभी टैस्टस में पास होने पर ही असली कहलाता है। मोती रत्न को रत्न शास्त्र के आधार पर पहचाने के लक्ष्ण:
1. यह वजन में हल्का होता है।
2. हार्डनेस मोह स्केल पर 3.00 होती है।
3. इसका वर्तनाम आर.आई मीटर पर 1.53 से 1.68 होता है।
4. इसकी सपेसिफिक ग्रेविटी 2.71 होती है।
5. मोती अत्यंत नाजुक होने के कारण जल्दी ही घिंसने लगता है।
6. इसकी प्रारम्भिक संरचना ऑरथोरोम्बिक होती है।
7. मोती कैलिश्यम कार्बोनेट, काॅन्कियोलिन व पानी की रासायनिक संरचना होती है।
Sanjay Dara Singh 
AstroGem Scientists
LLB., Graduate Gemologist (Gemological Institute of America), Astrology, Nemeorology, Vastu (SSM)
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