मैं ध्यान का मंत्र जानता हूँ। प्रबंधन का मंत्र क्या हैं?

Post Date: March 26, 2020

मैं ध्यान का मंत्र जानता हूँ। प्रबंधन का मंत्र क्या हैं?

प्रबंधन का आरम्भ मन से होता है। जब मन स्वयं को योग्य ढंग से सम्भालना सीख जाता है तो वह किसी भी वस्तु या स्थिति को सम्भाल सकता है।

मानव जीवन मूर्त और अमूर्त का एक मिश्रण है। हमारा शरीर मूर्त है और हमारा मन अमूर्त है। सकारात्मक और नकारात्मक दोनों विचार एक ही मन में उत्पन्न होते हैं। हम स्वयं के विषय में बहुत ही कम जानते हैं। अपने मन के विषय में हम जितना अधिक जागरू होंगे उतना ही हमें जीवन को उत्ष्कृट ढंग से समझने में सहयोग मिलेगा।

मानव जीवन की संरचना एक परमाणु की तरह है। परमानु के केन्द्र में प्रोटाँन है एवं इसके चारों ओर एक नकारात्म आवेश है। उसी प्रकार, हमारे अस्तित्व के केन्द्र में भी सद्गुण विद्यमान है। किन्तु यदि हमें इन सद्गुणों की पहचान नहीं है तो हम बाहरी कक्षा में ही घूमते रहते हैं। इसलिए हमें बिना किसी प्रमाण के यह बात मान लेनी चाहिए कि ये सद्गुण हमारे अंदर पहले से ही विद्यमान है।

सदैव स्मरण रहे कि आप विश्व के नागरिक हैं एवं सम्पूर्ण विश्व है और आप से सम्बद्ध है। सम्पूर्ण विश्व के प्रत्येक भाग से हमें कुछ न कुछ सीखना होगा-जैसे कि जापान से सहयोग भावना, जर्मनी से सुस्पष्टता, ब्रिटेन से शिष्टाचार और शालीनता, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से व्यवसायिक कुशलता तथा भरतीय गांवों से मानवीय मूल्य। खोजने पर आपको विश्व में हर जगह अच्छे गुण मिलेंगें। आपके अंदर भी वे गुण विद्यमान है। उन्हें केवल पोषित करने की आवश्यकता है।

यदि आप अपने चारों ओर के जीवन को श्रेष्ठता की ओर ले जाने हेतु प्रतिबद्ध हैं, यदि आप दया, सृजानात्मकता के लिए प्रतिबद्ध हैं, तब विश्व एक बेहतर स्थान होगा। प्रायः हम अपनी ही मानसिक धारणाओं तक सीमित रहतें हैं। यदि हम दूसरों की तरह भी सोचें तो हमें उनके विचारों को जानने का मौका मिलेगा हमें बदलते रहने और विभिन्न भूमिकाओं के लिए प्रयास करते रहने की आवश्यकता है।

किसी भी संगठन में शीर्ष प्रबंधन को यह स्पष्ट करते हुए लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए कि वह क्या प्राप्त करना चाहते हैं मध्यमक्रम के प्रबंधन वर्ग को यह देखना चाहिए कि लक्ष्य कब और किस प्रकार पूरे करने की आवश्यकता है। कनिष्ठ प्रबंधन को पूर्व निश्चित लक्ष्यांकों को प्राप्त करने के लिए संसाधनों का उपभोग करते हुए उसमें रूचि लेनी चाहिए और उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करनी चाहिए। शीर्ष स्तर पर काम करने वाले व्यक्तियों को विसतारवादी होना चाहिए और निचले स्तर पर काम करने वाले व्यक्तियों को गुणवत्ता के प्रति जागरूक बनना होगा। लेकिन इन सभी स्तर के व्यक्तियों को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। यह एक स्वस्थ संस्थान का लक्षण है।

प्रबंधन का एक महत्वूर्ण भाग है- सृजानात्मक। सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अध्यक्ष अपने उद्यम में सुधार लाना चाहते हैं, लेकिन वे अनुसंधान और विकास प ध्यान नहीं देते, जबकि सृजानात्मकता उद्यम का सबसे महत्वपूर्ण भाग है।

मौन सृजनात्मकता को जन्म देता है। यदि हम प्रतिदिन केवल दो मिनट मौन रहने का अभ्यास करें तो हम पायेंगें कि इससे हमारे जीवन को पूर्णतया एक नया आयाम मिल गया है।

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