मंगल की महादशा में सभी ग्रहों की अन्तर्दशा का फल

Post Date: December 18, 2019

मंगल की महादशा में सभी ग्रहों की अन्तर्दशा का फल

मंगल की महादशा में
सभी ग्रहों की अन्तर्दशा का फल

मंगल महादशा में मंगल की अन्तर्दशा का फल
मंगल की महादशा मे मंगल की हा अंतर्दशा चार महिने सत्ताईस दिन की होती है।
मंगल उच्च राशि, स्वराशि, शुभ ग्रहों से दृष्ट होकर यदि केन्द्र, त्रिकोण व अन्य शुभ भावगत हो तो जातक को मंगल की दशा एवं अंतर्दशा में शुभ फलों की प्राप्ति होती है। जातक दूसरों पर हावी होता है एवं उसमें क्रोध की अधिकता रहती है। जातक उत्साही व प्रयत्नशील रहता है एवं प्रगति प्राप्त करता है। जातक में क्रूरता व भावहीनता की भी बढ़ोत्तरी होती है।

अशुभ भावों में नीच राशि व शत्रु राशिगत एवं अशुभ ग्रहों की युति व प्रभाव होने से मंगल की महादशा में मंगल की अंतर्दशा अशुभ फलदायक एवं कष्टकारक होती है। जातक निराश होता है। अधिक क्रोध के कारण वह दूसरों से अपमानित है। जातक दुखी व ग्रसित भी रहता है।
मंगल महादशा में राहु की अन्तर्दशा का फल

मंगल की महादशा में राहु की अंतर्दशा एक वर्ष अठारह दिन की होती है।
मंगल और राहु दोनों ही नैसर्गिक पापी ग्रह हैं। मंगल की महादशा में राहु की अन्तर्दशा में मिश्रित फल मिलते हैं। शुभ मंगल की महादशा में शुभ राहु का अन्तर चल रहा हो तो जातक को अचानक मकान, भूमि व धन की प्राप्ति होती है। जातक शत्रुओं को परास्त करता है।
अशुभ राहु के प्रभाव में जातक वहमी, लालची, झगडालू एवं कष्ट पाता है। जातक को पेट या वायु संबंधी विकार रहते हैं।
मंगल महादशा में गुरू की अन्तर्दशा का फल

 

मंगल की महादशा में गुरू की अंतर्दशा ग्यारह महीने छः दिन की होती है।
शुभ मंगल की दशा में यदि शुभ गुरू की अन्तर्दशा चले तो जातक को यश की प्राप्ति होती है। उसे सफलता व उन्नति प्राप्त होती है। जातक की धार्मिक कार्यो में रूचि बढ़ती है। जातक को सुख की प्राप्ति होती है।
अशुभ और निर्बल गुरू की अन्तर्दशा में जातक को मानसिक कष्ट व असफलता प्राप्त होती है। जातक धैर्यहीन हो जाता है।

मंगल महादशा में शनि की अन्तर्दशा का फल
मंगल की महादशा मे शनि की अंतर्दशा एक वर्ष एक महीने व एक दिन की होती है।
मंगल महादशा में शनि की अन्तर्दशा मे; राहु की अंतर्दशा जैसे मिश्रित फल प्राप्त होते हैं। निम्न वर्ग से लाभ प्राप्ति होती है। जातक क्रूर कर्मो में लिप्त रहता है एवं धन प्राप्त करता है।
अशुभ भावों में एवं शत्रुव नीच राशि का शनि जातक की बुद्दि मलिन करता है एवं वह क्रूर एवं नीच कार्योंमें संलग्न रहता है। जातक स्वजनों से झगड़ा करता है एवं दुखी, पीड़ित व अपमानित होता है।

 

मंगल महादशा में बुध की अन्तर्दशा का फल

मंगल की महादशा में बुध की अंतर्दशा ग्यारह महीने सत्ताईस दिन की होती है।
बुध शुभ हो एवं केन्द्र, त्रिकोण या शुभ स्थान में हो तो मंगल की महादशा में बुध की अंतर्दशा जातक को शुभत्व प्रदान करती है। जातक अपनी बुद्धि के साथ साथ परिश्रम भी करता है। जातक को व्यवसाय में लाभ होता है। जातक को सुख व धन की प्राप्ति होती है।
अशुभ स्थान व पाप ग्रहों के प्रभाव में बुध से जातक की बुद्धि मलिन होती है। व्यवसाय में हानि होती है एंव जातक धोखा देता है। कलह व धैर्यहीन स्वभाव से जातक कष्ट पाता है। पेट व चर्म संबंधी रोग भी जातक को ऋस्त करते हैं।

मंगल महादशा में केतु की अन्तर्दशा का फल
मंगल की महादशा में केतु की अन्तर्दशा चार महीने सत्ताईस दिन की होती है।
शुभ केतु की अन्तर्दशा में जातक को सुख व शांति मिलती है। जातक के उत्साह में वृद्धि होती है। उसके पढ़ में वृद्धि और सत्कार होता है।
अशुभ केतु की दशा में जातक भयभीत, निराश व रोग से पीड़ित रहता है। अपयश, व्यर्थ परेशानी व भटकाव से जातक दुखी होता है।

मंगल महादशा में शुक्र की अन्तर्दशा का फल
मंगल की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा एक वर्ष दो महीने की होती है।
जब मंगल की महादशा में शुभ शुक्र की अन्तर्दशा हो तो जातक चंचल, कामातुर ईर्ष्यावान व द्वेषी होता है। राज्य कृपा से जातक को भूमि की प्राप्ति होती है। नाटक, संगीत, सिनेमा, नाच, गाने, इत्यादि में जातक की रूचि बढ़ती है।
पाप ग्रहों द्वारा युक्त या दृष्ट या अशुभ भावों व नीच व शत्रु राशियों में स्थित शुक्र की अन्तर्दशा में जातक को विदेश में गमन करना पड़ता है। नीच स्त्री के संसर्ग में धन और मान की हानि होती है। जातक का स्वास्थ्य क्षीण हो जाता है। कलह, शोक, पीड़ा और भय से जातक दुखी रहता है।

मंगल महादशा में सूर्य की अन्तर्दशा का फल
मंगल की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा चार महीने छः दिन की होती है।
मंगल की महादशा में जब उच्च, स्वराशि, शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट सूर्य की अन्तर्दशा चलती है तो जातक राज्य से विशेष लाभ प्राप्त करता है। जातक उच्चाधिकारियों का कृपापात्र बवता है। जातक शत्रुओं को परास्त कर सकता है। जातक को सुख की प्राप्ति होती है।
नीच व शत्रु राशि में पाप ग्रहों के प्रभाव में व निर्बल सूर्य की अंतर्दशा व मंगल की महादशा कष्ट कारक होती है। जातक को हानि, पैतृक संपत्ति संबंधित नुकसान हो सकता है। जातक के माता पिता को कष्ट प्राप्त होता है। जातक रोगों से ग्रस्त रहता है। मानसिक तनाव व हानि जातक को दुखी करते हैं।

 

मंगल महादशा में चन्द्रमा की अन्तर्दश का फल
मंगल की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा सात महीने की होती है।
शुभ मंगल की महादशा में जब शुभ और बली चन्द्रमा की अन्तर्दशा चलती है तो जातक को श्वेत वस्तुओं व धातुओं के व्यवसाय से विशेष लाभ मिलता है। जातक सुखी व स्वस्थ रहता है।
जातक रोगग्रस्त व चिंतायुक्त रहता है। जातक का चित्त अस्थिर रहता है जातक स्वप्न लोक में रहता है व ऊँचे-ऊँचे कार्यो का विचार करता है।

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