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बच्चों का पालन पोषण-दोतरफा यात्रा: परिचय अपने बच्चों से– श्री श्री रवि शंकर

Post Date: August 12, 2020

बच्चों का पालन पोषण-दोतरफा यात्रा: परिचय अपने बच्चों से– श्री श्री रवि शंकर

दूसरा भाग

  1. हम अक्सर बच्चों में बाँटने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित नहीं करते हैं। जो भी उन्हें देते हैं, उन्हें उन तक ही सीमित रखने को कहते हैं। एक सीमा के बाद ऐसा करने से उनका दम घुटने लगता है। उनकी चीजों पर अपना पकड़-बनाये रखने की आदत हो जाती है। जो उनकी प्रगति में बाधक हो सकती है हमारे द्वारा किये गये छोटे छोटे कार्य, हमारे व्यक्तित्व की झलक देते है। यदि हम उनको सबके साथ मिल बाँट कर और मिलजुल कर रहने की आदत डालेंगे तो यह उनके विकास में भी सहायक होगा। इस तरह हम उनके विकास के दौरान अर्जित किये जाने वाले लक्षणों में सुधार कर सकते है। परन्तु हम बच्चों के भीतर उपस्थित कुछ जन्मजात प्रवृत्तियों के लिए कुछ नहीं कर सकते हैं। वह वैसे भी आयेगा ही। इन दोनों में भेद करने की क्षमता हम में होनी चाहिए। इसी में बुद्धिमता है। अगर आप ऐसा कर पाते है तो समझ लें कि आधा काम हो गया बाकी, आधा आप ईश्वर पर छोड़ दो। उस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है। तो, यह पुरी प्रक्रिया बहुत धैर्य और सहनशीलता सिखीती है, साथ उन्हें लक्ष्य की ओर अग्रसर करती है।
  2. माता पिता के सामने उनके बच्चों के भविष्य के लिए उन्हें सपने दिखाना और उस दिशा में आगे बढ़ने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना, यह सब से बड़ी चुनौती है।

to be continued………..

The next part will be published tomorrow…

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