प्रश्न और उत्तर ।श्री श्री रविशंकर जी प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर दे रहें हैं।

Post Date: April 7, 2020

प्रश्न और उत्तर ।श्री श्री रविशंकर जी प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर दे रहें हैं।

गुरूजी, एक ऐसी मुस्कराहट है जो अंतरात्मा से आती है और इसके अलवा एक दूसरी मुस्कराहट है जो केवल लोगों को प्रभावित करने के लिए दी जाती है। मैं महेशा कैसे मुस्करा सकता हूँ?

अमेरिका में एक कहावत है “तब तक दिखावा करो जब तक वह तुम्हारा स्वभाव न बन जायें” (“fake it till you make it ”) । देखो जब आप बच्चे थे तब अनेकों बार मुस्कराते थे, यह आपको स्वाभाविक रूप से मिला है। लेकिन अब यह किसी तरह बदल गया है। चिंता न करें, चाहे कृत्रिम ही क्यों न हो हमेशा मुस्कराते रहने की आदत बनाइये और आप देखेंगे कि इस प्रकार आदत में सुधार से आप प्रायः कम अशांत होंते। जब आप अप्रसन्नता व्यक्त करते हैं, आप 72 मांसपेशियों और नाड़ियों का प्रयोग करते हैं; यद्धपि जब आप मुस्कराते हैं तो केवल 04 का ही प्रयोग करते हैं। यदि आप आर्थिक दृष्टि से भी देखें, तो यह एक अच्छा विचार है-नाराजगी व्यक्त करके अपनी ऊर्जा व्यर्थ मत करो। इसलिए प्रत्येक दिन कुछ समय निकाल कर यदि आप गहरी सांस को महसूस करें, आप शरीर और मन दोनों को विश्राम दे सकते हैं।

आप दोपहर के बाद अर्थात 3 या 4 बजे तक ऊबने लगते हैं। इसलिए मैं दोपहर के भोजन के बाद कोई वार्ता नहीं करता हूँ, तब मैं निद्राग्रस्त महसूस करता हूँ और कभी-कभी झपकी ले लेता हूँ। लेकिन यदि आ कोई श्वसन-क्रिया का अभ्यास या ध्यान करते हैं, तो यह कुछ ही मिनटों में आपके सपूर्ण शरीर को स्फूर्ति प्रदान करता है। ऐसा भारत की लगभग 175-180 कंपनियों के कर्मियों का अनुभव रहा है। जब दिन के अंत में उन्होंने ध्यान का अभ्यास किया, तो लोगों ने महसूस किया कि जैसे उनमें अचानक जीवन लौट आया है।

जब वे घर वापस जायें हैं तो पूरी तरह से थके हुए न हों, वे अपने पति/पत्नि या बच्चों के साथ समय व्यतीत करने में सक्षम हों, वे 10 बजे तक टेलीविजन देखने में सक्षम हों। ये वे लोग हैं जो पूरे दिन फैक्ट्री में काम करते हैं, और जब शाम को घर आते हैं तो वे बेहद थके हुए होते हैं। वे हैं, और वह उर्जा केवल भोजन और सोने से नहीं   खाना खाकर एकदम सोने के लिए तैयार होते हैं। उन्हें उर्जा की आवश्यकता हैं, और वह उर्जा केवल भोजन और सोने नहीं आयेगी, लेकिन गहरे ध्यान के माध्यम से एवं शांत चेतना की स्थिति में प्राप्त होगी।

ये अभ्यास हमारे मन को केन्द्रिय और शांत रहमे में हमारी सहायता करते हैं। लेकिन क्या आप आत्मदर्शन या परमात्मा से मिलन या मोक्ष पर प्रकाश डाल सकते हैं।

जी हाँ, निश्चित रूप से ईश्वर से कुछ भी नहीं छिपा है। ईश्वर प्रेम हैं, ईश्वर वह उर्जा है, जो सब जग विद्यामान है। मैं आपको एक छोटी कहानी सुनाता हूँ। लगभग आठ वर्ष के एक छोटे लड़के ने अपने पिता से पूछा, “पिताजी, मुझे बताओ ईश्वर क्या हैं? ईश्वर किसके जैसे दिखते हैं? ” पिता बच्चे को अपनी गोद में लेता है और उससे पूछता है, “क्या तुम आकाश देख सकते हो, क्या तुम अंतरिक्ष देख सकते हो?”

लड़का कहता है, “जी हां।”

पिता उत्तर देता है, “ईश्वर उसके जैसे हैं।”

अंतरिक्ष से बाहर कुछ भी नहीं है। प्रत्येक वस्तु अंतरिक्ष में विद्यमान है, अंतरिक्ष में पैदा हुई है, और अंत में अंतरिक्ष है। इस अनुभव के लिए आपको कुछ समय विश्राम करने की आवश्यकता है और आपको गहरे ध्यान में जाना चाहिये। इसलिए पहले मानव बनों, और तत्पश्चात मानववाद से धर्मपरायणता की ओर बढ़ो।

हम जिस क्षण सोकर उठते हैं उससे रात को वापस बिस्तर पर जाने तक चारों तरफ से समस्याओं से घिरे रहते हैं, कोई व्यक्ति इन सबके बीच कैसे मुस्करा सकता हैं? यदि आप केवल समस्या पर ही ध्यान केन्द्रिय रखते हैं तो आप मुस्करा नहीं सकते। लेकिन आप में जो समस्याओं को सुलझा रहा है, वह शीशे जैसा सच्चा है और समस्या से अधिक शक्तिशाली है। उसको जानो और तब आप मुस्करा सकते हो।

मैं आपसे सहमत सहमत हूँ, उन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए मैं सूर्य की ओर मुंह करके गायत्री मंत्र का जाप करता हूँ। कुछ क्षण के लिए मुझे राहत मिलती है लेकिन शेष समय के लिए क्या करूं?

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