प्रकृति / गुण

Post Date: October 29, 2019

 प्रकृति / गुण

प्रकृति

पित्त

शरीर के भीतर एक तरल पदार्थ जो यकृत (Liver) में बनता है एवं पाचक में सहायक होता है पित्त कहलाता है। पित्त के विकार से शरीर की पाचन क्रिया असंतुलित होती है।

कफ

थूकने या आंसने के समय शरीर से निकलने वाले श्लेष्मा व कफ कहा जाता है। कफ भी खाने को पचाने में सहायक होता है।

वात

शरीर के भीतर की वायु जिसके विकार से अनेक रोग उत्पन्न होते है। वात कहलाता है।

गुण

गुण तीन प्रकार के होते हैं।

  1. सत् गुण
  2. रज गुण
  3. तमस गुण

 

  1. सत् गुण

सत गुण निर्मल होता है। यह सुख और ज्ञान की आसक्ति करता है। सत्व गुण की प्रबलता से मनुष्य सहृदयी, निस्वार्थी एवं वैराग्य की ओर प्रवृत होता है।

  1. रज गुण

रज गुण कामना से संबंधित होता है। यह गुण मनुष्य का रूझान कर्म की तरफ बढ़ता है। इससे कर्म के फल की चिंता भी जातक को होती है। रजोगुण की प्रवलता होने पर मवुष्य स्वार्थी, भौतिक सुख-साधनों के लिए कार्यरत् रहता है।

  1. तमस गुण

तमस गुण अज्ञान से उत्पन्न होता है। यह मनुष्य को आलसी बनाता है। इस गुण की प्रबलता से मनुष्य पापी, नीच कार्य करने वाला, अज्ञानी व असफल होता है। ऐसे मनुष्य को दूसरों की निंदा भी प्रिय रहती है।

 

 

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