निश्कपटता और आशीर्वाद :- श्री श्री रवि शंकर

Post Date: July 15, 2020

निश्कपटता और आशीर्वाद :- श्री श्री रवि शंकर

प्रश्न: आशीर्वाद बहुत लोग चाहते हैं पर मिलता कुछ को ही है। ऐसा क्यों?

श्री श्री: आशीर्वाद देने वाला तो हमेशा देता ही रहता है पर उसे कोई लेने वाला नहीं होता- निष्ठा की कमी है। आशीर्वाद देने वाला नि:संकोच सब को देता है, पर पाने वाले के हृदय में सच्चाई होनी चाहिए। आशीर्वाद पाने के लिए निष्कपटता ही योग्यता है। और प्रत्येक व्यक्ति कभी भी, कहीं भी, निष्कपट और ईमानदार होने के लिए आज़ाद है।

प्रश्न: व्यक्ति केवल कभी-कभी ही क्यों निष्कपट होते हैं

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श्री श्री: उनको यह भ्रम है कि ईमानदारी अपनाने से शायद कुछ क्षणिक सांसरिक सुख उनको नहीं मिलेंगे। ऐसे सुख भोगने की लालसा उन्हें बेईमान बना देती है। जब तुम निष्कपट हो, बिना प्रयास ही तुम्हें सारे सुखों का आनंद मिल जाता है। निर्धन अपना पेट भरने के लिए संघर्ष करते हैं। धनी अपना भोजन बाँटकर खाते हैं। उनसे धनी हैं वे जो अपने अधिकारों को बाँटते हैं। उनसे भी अधिक धनी वे व्यक्ति हैं जो अपना यश बाँटते हैं। सबसे धनवान हैं वे जो स्वयं को बाँटते हैं। किसी व्यक्ति की स्म्पन्नता का परिचय उसके संग्रह से नहीं बल्कि दूसरों के साथ सब-कुछ बाँटने की क्षमता से है।

अपनी आंतरिक गहराई में रहना ही निष्कपटता है।

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