ज्योतिष ज्ञान के लिए पंचांग का ज्ञान आवाश्यक है।

Post Date: October 22, 2019

ज्योतिष ज्ञान के लिए पंचांग का ज्ञान आवाश्यक है।

ज्योतिष ज्ञान के लिए पंचांग  का ज्ञान आवाश्यक है। पंचांग का अर्थ है पांच अंग। ये पांच अंग, तिथि, नक्षत्र, योग करण और वार माने गए हैं।

तिथि

चंद्रमा की एक कला को तिथि माना गया है। तिथियाँ हमें बताती हैं कि चंद्रमा और सूर्य की उस समय कितनी दूरी हा। एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती है

करण

तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। एक चंद्रमास में 30 तिथियां होती हैं, इसलिए एक मास में 60 करण होंगे। करण कुल ग्यारह होते हैं, चार स्थित तथा सात चर।

वार

वार सात होते हैं, जैसे रविवार, सोमवार, बुधवार, गुरूवार, शुक्रवार और शनिवार। ज्योतिष अनुसार वार सूर्योदय से प्रारंभ होता है न कि रात के 12 बजे ज्योतिष शास्त्र में सबसे प्रथम वार रविवार होता है।

नक्षत्र

तारोंके समूह को नक्षत्र कहा जाता है। सम्पूर्ण आकाश मण्डल  को 27 भागों में बांटा गया है। नक्षत्र अपनी जगह पर स्थित होते हैं। आकाश मण्डल की दूरी नक्षत्रों से ही नापी जाती है। नक्षत्र यानी तारों के समूह से कही अश्व, शकट, सर्प, हाथ आदि जैसे आकार दिखाई पड़ते हैं। इन 27 नक्षत्रों के अलावा अभिजित को 28 वां नक्षत्र माना गया है। एक ही तारे का ये नक्षत्र समस्त कार्यों के लिए शुभ माना गया है।

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