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जब हम प्रसन्न होते हैं:- श्री श्री रवि शंकर

Post Date: June 27, 2020

जब हम प्रसन्न होते हैं:- श्री श्री रवि शंकर

जब हम प्रसन्न होते हैं, हम पूर्णता नही खोजते। अगर तुम पूर्णता खोजते हो, तब तुम आनन्द के स्रोत में नहीं | यह सृष्टि बाहर से त्रुटिओं से भरी दिखाई देती है पर भीतर से सम्पूर्ण है, त्रुटिहीन है। पूर्णता अदृश्य है; अपूर्णता दिखाई देती है। ज्ञानी सतह पर उलझे नहीं रहते, गहराई में जाते हैं। संसार में कुछ भी धुंधला या अस्पष्ट नहीं है, तुम्हारी दृष्टी ही धुंधली है। चैतन्य की सम्पूर्णता में अनगिनत क्रियाएँ चलती हैं, फिर भी चैतन्य परिपूर्ण व अछूता रहता है। सत्संगियों, इसे अब समझो और शांन्ति से रहो, खुश रहो आनन्द है यह समझ लेना कि ज्ञान से कोई अवकाश नहीं|

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