जन्म पत्रिका का सबसे पहले नीचे दिये क्रमानुसार अध्ययन करना चाहिये।

Post Date: January 1, 2020

जन्म पत्रिका का सबसे पहले नीचे दिये क्रमानुसार अध्ययन करना चाहिये।

जन्म पत्रिका का सबसे पहले नीचे दिये क्रमानुसार अध्ययन करना चाहिये।

लग्न
लग्नेश
राशि
राशेश
भाव
भावेश

अन्य नियम

ग्रहों के उच्च, मूल त्रिकोण, स्वराशि, मित्र, सम, शत्रु एवं नीच राशि में स्थिति का प्रभाव ज्ञात होना चाहिये। उच्च राशि में ग्रह विशेष बलवान होता है। मूलत्रिकोण में बली, स्वराशि मं मूलत्रिकोण से कम, मित्र राशि में साधारण बलवान एवं शुभ, सम राशि में निष्फल, शत्रु राशि में बलहीन व नीच राशि में बलरहित होता है।

जन्म पत्रिका में प्रत्येक ग्रह और भाव पर विचार कर उसका दृष्टि संबंध रा विचार करना चाहिये। शुभ ग्रहों की दृष्टि शुभत्व एवं पाप ग्रहों की दृष्टि अशुभ फल देने वाली होती है। इसमें गुरू की दृष्टि अमृत वर्षा के समान होती है वही शनि की दृष्टि घोर कष्टकारी व अशुभ परिणाम देती है।

ग्रहों के गुण धर्म और राशि के गुण धर्म पर भी विचार करना चाहिये

ग्रहों के अस्त होने का विचार भी करना चाहिये। अस्त बलहीन होता है। सिर्फ बुध ग्रह ही अस्त होते हुए भी उदित ग्रह का फल दे सकता है।

Share the post

Share this post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *