छठे भाव में मंगल का प्रभाव

Post Date: April 8, 2020

छठे भाव में मंगल का प्रभाव

छठे भाव में मंगल का प्रभाव

कुंडली का छठे भाव से रोग, शत्रु कर्ज एंव ननिहाल के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। छठे भाव में सबसे शक्तिशाली एवं उर्जावान ग्रह मंगल छठे भाव में स्थित होने से जातक बलवान व धैयशाली रहता है। ऐसे जातक के शक्तिशाली प्रभाव से उसके शत्रुभी उससे डरते है। मंगल में नेतृत्व व अधिकार जमाना, सुरक्षा करना ये सब गुण होते है। पुलिस विभाग मुख्य रूप से मंगल के कारकत्व में आता है। इस कारण छठे भाव में स्थित मंगल के प्रभाव से जातक के पुलिस अफिसर बनने के योग बनाते है। मंगल के छठे भाव में स्थित होने से जातक के शत्रु भी शक्तिशाली होते है। लेकिन जातक के रौब व प्रभाव से सामने वह टिक नही पाते। छठे घर में स्थित मंगल के प्रभाव से जातक जासूस होने की संभावना रहती है। ऐसे जातक को तीखे या नमकीन पदार्थ खाने में रूचि होती है। अधिक खाने से उष्णता के कारण ऐसे जातक को रोग होने की संभावना रहती है। छठे भाव में स्थित मंगल के प्रभाव से जातक को ननिहाल पक्ष से शुभ फल प्राप्त होते है। ऐसे जातक को स्त्रियों की ओर से लाभ होने की संभावना हो सकती है। छठे भाव में स्थित मंगल के होने से जातक शत्रुनाशक धनवान यशस्वी तथा बलवान होता है। छठे भाव में स्थित मंगल क होने से जातक शत्रुनाशक धनवान यशस्वी तथा बलवान होता है। छठे भाव में मंगल होने से जातक उत्साही व कुशल कार्यकर्ता होता है। ऐसे जातक के अनेक शत्रु होते है। परंतु वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। प्रत्येक कार्य को करने के लिये जातक अधीर व उतावला रहता है। छठे भाव में पापग्रह शुभ फल करते है। ऐसी मान्याता है। अन्य ग्रहों की शुभ व अशुभ प्रभाव को देखकर ही फल बताना चाहिये।

सप्तम दृष्टि
छठे भाव में स्थित मंगल की सप्तम पूर्ण दृष्टि बारहवे भाव पर पड़ती है। मंगल की बारहवे भाव पर दृष्टि होने से जातक अधिक धन खर्च करता है।

चतुर्थ दृष्टि
छठे भाव में स्थि मंगल की चतुर्थ दृष्टि नवम (भाग्य) भाव पर पड़ती है। मंगल की नवम भाव पर दृष्टि के प्रभाव से जातक का धर्म प्रति रूचि होती है।

अष्टम दृष्टि
छठे भाव में स्थित मंगल की अष्टम दृष्टि प्रथम (लग्न) भाव पर पडती है। मंगल की लग्न पर दृष्टि होने से मंगल के प्रभाव से जातक क्रोधी व अभिमानी होता है।

छठे भाव में मंगल का मित्र राशि में प्रभाव
छठे भाव में मंगल मित्र राशि में होने से जातक अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। झगडे तथा झंझटो के बारे में लाभ मिलता है।

छठे भाव में मंगल का शत्रुराशि में प्रभाव
छठे भाव में मंगल का शत्रुराशि में स्थित होने से जातक को रक्त विकार रोग होने की संभावना रहती है। जातक अस्वस्थ रहता है।

छठे भाव में मंगल का स्वराशि, उच्च व नीच राशि में प्रभाव
छठे भाव में मंगल अपनी स्वराशि मेष या मंगल में स्थित होने से जातक अपने शत्रुओं पर अपना प्रभाव रखता है। परिश्रम से आत्मबल प्राप्त करता है।

छठे भाव में मंगल का अपनी उच्च राशि मकर में स्थित होने से जातक शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता हैं। वह पराक्रमी और परिश्रमी होता है। ऐसा जातक पुलिस विभाग में अधिकारी होता है।

छठे भाव में मंगल अपनी नीचराशि कर्क में होने से जातक का अपने खर्चो पर नियंत्रण नही रहने से कर्ज लेना पड़ता है। तथा वह अस्वस्थ व निर्बल रहता है।

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