चमत्कारी रत्न_नीलम का लाभ व् हानि । Sanjay Dara Singh AstroGem Scientist

Post Date: June 30, 2020

चमत्कारी रत्न_नीलम का लाभ व् हानि । Sanjay Dara Singh AstroGem Scientist

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#अमिताभ_बच्चन ने भी क्यों पहना था नीलम ?
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वर्तमान समय में अगर किसी रत्न को चमत्कारी रत्न की संज्ञा दी गई है तो वह रत्न सिर्फ नीलम हैं। यह हल्के नीले से गहरे नीले रंग का पारदर्शी रत्न है। आसमानी नीले रंग के नीलम को इन्द्र नीलम कहते हैं, हरे रंग की आभा वाले नीलम को मोरपंखी नीलम, तथा नीली व पीली आभा के नीलम को पीताम्बर कहते हैं, नीलम अन्य कई फैन्सी रंगों में भी पाया जाता है। नीलम कुरन्दम प्रजाति का एक बेशकीमती रत्न है। नीलम रत्न अच्छे स्वास्थय, जटिल बिमारियों में लाभ, शोहरत, सम्मान, ख्याति, सकारात्मक गुणों की बढ़ोतरी, अच्छे भविष्य, दर्षन शास्त्र, अर्थ शास्त्र, पुत्र सन्तान सुख, धर्म, ऐश्वर्य, धार्मिक कार्य, मुकदमे व झगड़े इत्यादि में सफलता, आत्मिक शांति, अध्यातम, न्यायप्रियता, स्वतन्त्रता, भक्ति, दान, वाहन सुख, भूमि सुख, भवन सुख, दया की भावना, वैराग्य, शक्ति इत्यादि के संदर्भ में धारण किया जाता है,

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुम्भ व मकर राशि का स्वामी ग्रह शनि होता है और सौरमण्डल में सबसे सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है जो ढ़ाइ वर्ष में अपनी एक परिक्रमा पूरी करता है। जिस भी जातक की जन्म कुण्डली में शनि कमजोर स्थिति में होता है उन्हें नीलम रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है।

#व्यवसायिक_दृष्टि_से :
जो व्यक्ति भूमि व्यवसाय, ठेकेदारी का कार्य, अध्यातमिकता के कार्य, न्यायधीश, वकील, धर्म गुरू, जटिल रोग निवारक दवाईयां, आॅप्रेशन में महारत, सरकारी आरोप, पराधीनता, नौकर वर्ग, जेल यात्रा, देश निकाला, विश्वासघात, अशिक्षा, नपुंसकता, आलस्य, दुख, घर में कलह, अंग्रेजी शिक्षा, जुआ, मदिरापान, मृत्यु, भय, अपमान, निन्दा, कर्जा होना, तिल, तेल, लोहा, कारखाना, किसी प्रकार की ऐजेंसी, मोटर व्हीकल व पार्टस, काले वस्त्र, भैंस क्रय – विक्रय, शेयर बाजार, कैमिकल व्यावाय, ईंधन गैंस व फियूल व्यवसाय, चमड़ा व्यवसाय इत्यादि कार्यों से जुड़े होते हैं उन्हें भी नीलम रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। जो व्यक्ति उपरोक्तलिखित कार्यों से संबंधित किसी भी प्रकार से चाहे वह तकनीकी, उत्पादकता, क्रय-विक्रय इत्यादि रूप से जुड़े होते हैं उन्हें भी यह नीलम रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है।

#शारीरिक_दृष्टि_से :
नीलम रत्न पेट, लीवर, वात रोग, अल्सर, घुटनों के रोग, मांसपेषियों के रोग, नर्वस सिस्टम, किसी भी रोग में तीव्र गति से बिमार होना, षारीरिक षक्ति, किसी बिमारी में ऑप्रेशन होना, असाध्य रोग, कैंसर, अचानक दुर्धटना, सर्वाइकल, रीड़ की हडडी के रोग, टांगों के रोग इत्यादि का कारक है। उपरोक्त संदर्भ में नीलम धारण करने से लाभ होता है।

रत्न विज्ञान के अनुसार नीलम शुद्ध ऐलुमीनियम ऑक्साइड है। नीलम रत्न भारत, ब्राजील, रशिया, श्रीलंका, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, यू.के., नेपाल, मैक्सिको, जाम्बिया, नाईजीरिया, कम्बोडिया, कजेच, मयामार, मोजाम्बिक भारत में नीलम जम्मु में पाया जात है तथा विश्व में बेहतरीन व बेशकीमती माना जाता है। फिल्म अभिनेता श्री अमिताभ बच्चन जी ने भी जम्मु की खान से निकले नीलम को ही धारण किया हुआ है। जम्मु की खाने कई दशकों से बंद है। भारत के उड़ीसा राज्य में भी नीलम की खाने हैं परन्तु यहां से निकलने वाला नीलम कम गुणवत्ता का होने के कारण बाजारों में कम प्रचलन में है। वर्तमान समय में श्रीलंका व मोजाम्बिक का नीलम विश्व में बहुत अच्छी गुणवत्ता का माना जाता है तथा बाजारों में प्रचलन में भी है तथा कीमती भी, थाइलैंड का नीलम भी बाजार में काफी प्रचलन में है श्रीलंकन नीलम व मोजाम्बिक के बाद सबसे ज्यादा प्रचलित थाईलैंड का नीलम ही है इसका सबसे बडा कारण है इसकी कीमत का कम होना। कीमती कम होने का कारण है कि इसमें ट्रीटमेंट व कांच की एवं नकली रंग की फीलिंग होना। बाजार में थाईलैंड से निकला उत्पाद अच्छी ओर बेहतर गुणवत्ता में भी होता है परन्तु वह भी कीमती हो जाता है। इसीलिए दुकानदार अधिक मुनाफा कमाने के लिए कम कीमत व कम गुणवत्ता का थाईलैंड के नीलम को श्रीलंका का नीलम कहकर बेच देते हैं। इसीलिए ग्राहकों को सर्टिफाइड उत्पाद में भी रत्न के ओरिजिन साॅर्स की तरफ भी ध्यान देना चाहिए कि रत्न का उदगम क्षेत्र कौन-सा है। इसीलिए ग्राहकों को सतर्क रहते हुवे उन्हें किसी भी अच्छे ब्राण्ड का सील्ड व सर्टिफाईड उत्पाद ही खरीदना चाहिए क्योंकि बिना प्रमाणिकता के रत्नों में ग्राहक के साथ धोखा होने की संभावना अधिक होती है।

रत्नों की प्रमाणिकता को लेकर रत्न शास्त्र में कुछ टैस्ट होते हैं अगर कोई रत्न उन सभी टैस्टस में पास होने पर ही असली कहलाता है। असली प्राकृतिक नीलम रत्न को रत्न शास्त्र के आधार पर पहचाने के लक्ष्ण:

1. यह पारदर्शी रत्न होता है।
2. इसकी हार्डनेस मोह स्केल पर 9.00 होती है।
3. यह तेजाब, सूखापन, अम्ल, कैमिकल्स के प्रति संवेदनशील नहीं होता।
4. इसका वर्तनाक आर.आई. मीटर पर 1.76 – 1.77 होती है।
5. इसकी सपेसिफिक ग्रेविटी 4.00 होती है।
6. इसक ऑप्टिक कैरेक्टर डी.आर. 0.008 होता है।
7. प्राकृतिक नीलम को इनकैंडेसेंट लाईट में देखने पर क्रिस्टल, सिल्क, फैदर इत्यादि आकृतियां नजर आती हैं।
8. नीलम ऐलुमीनियम ऑक्साइड की रासायनिक संरचना होती है।

Sanjay_Dara_Singh
AstroGem Scientists

LLB., Graduate Gemologist (Gemological Institute of America),
Astrology, Nemeorology, Vastu (SSM)

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