एक वर्ष में कुल 12 संक्रांतियां आती हैं। इनमे से मकर संक्रांति का महत्त्व सर्वाधिक है, क्योंकि यहीं से उत्तरायण पुण्य काल (पवित्र/शुभ काल) आरम्भ होता है।

Post Date: January 14, 2020

एक वर्ष में कुल 12 संक्रांतियां आती हैं। इनमे से मकर संक्रांति का महत्त्व सर्वाधिक है, क्योंकि यहीं से उत्तरायण पुण्य काल (पवित्र/शुभ काल) आरम्भ होता है।

Makar sankranti

मकर संक्रांति का महत्त्व सूर्य के उत्तरायण हो जाने के कारण है। शीत काल जब समाप्त होने लगता है तो सूर्य मकर रेखा का संक्रमण करते (काटते) हुए उत्तर दिशा की ओर अभिमुख हो जाता है, इसे ही उत्तरायण कहा जाता है। एक फसल काटने के बाद इस दौरान दूसरे फसल के लिए बीज बोया जाता है।

एक वर्ष में कुल 12 संक्रांतियां आती हैं। इनमे से मकर संक्रांति का महत्त्व सर्वाधिक है, क्योंकि यहीं से उत्तरायण पुण्य काल (पवित्र/शुभ काल) आरम्भ होता है। उत्तरायण को देवताओं के काल के रूप में पूजा जाता है। वैसे तो इस सम्पूर्ण काल को ही पवित्र माना जाता है, परन्तु इस अवधि का महत्त्व कुछ ज्यादा है। इसी के बाद से सभी त्यौहार आरम्भ होते हैं।

महत्व और क्यों मकर संक्रांति मनाई जाती है | Significance and why Makar Sankranti is celebrated in Hindi

मकर संक्रांति संदेश – श्री श्री रवि शंकर

मकर संक्रांति, पुणे एवं मेरा एक सम्बन्ध है। हर वर्ष इस समय आप लोग कुछ न कुछ ख़ास कर बैठते हैं और मुझे यहाँ बुला लेते हैं। इसलिए मैं फिर से कहूँगा, ‘तिल गुड़ घ्या, अणि गोड़ गोड़ बोला’। आज मैंने देखा कि तिल ऊपर से काला है और अन्दर से सफ़ेद। यदि ये बाहर से सफ़ेद और भीतर से काला होता तब बात कुछ और होती। आज तिल और गुड़ मिल कर देश को ये सन्देश दे रहे हैं कि, भीतर से उज्जवल (शुद्ध) रहें।

यदि हम तिल को थोडा रगड़ें तो यह बाहर से भी सफ़ेद हो जाता है। ब्रह्माण्ड या सृष्टि के परिप्रेक्ष्य में हम सभी तिल के ही सामान हैं। यदि हम देखें तो, ब्रह्मांड /सृष्टि में हमारा क्या महत्व है; जीवन क्या है? कुछ भी नहीं, तिल के सामान; एक कण जैसा ! हम सभी अत्यंत सूक्ष्म हैं। हमें इस बात को याद रखना है।

हम लोग बेहद छोटे और मधुर हैं; जैसे कि तिल और गुड़ । इसलिए छोटे और मीठे बने रहें, और इस तरह एक दिन हम वास्तव में बड़े बन जाएंगे। यदि हम सोचते हैं कि हम किसी क्षेत्र या स्थान पर बहुत बड़े हैं, तो जीवन में गिरावट आरम्भ हो जाएगी। यह अनुभव किया हुआ सत्य है। हम देखते हैं कि हजारों लोगों के जीवन में ऐसा ही होता है। जिस क्षण मद (घमंड) या यह भ्रम कि, ‘मैं कुछ हूँ’ आता है, अधोवनति आरम्भ हो जाती है। मैं बहुत शक्तिशाली हूँ- यही वह बात है, जहाँ से पतन आरम्भ होता है।

Share the post

Share this post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *